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परिवहन विभाग का बड़ा फर्जीवाड़ा: क्या हवा में चल रही हैं धर्मसिंहवा की बसें?

।। रोडवेज के नाम पर सिर्फ धोखा, निजी वाहनों की लूट का शिकार हो रहे ग्रामीण।

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। कागजों में ‘फर्राटा’ भर रहीं बसें, धरातल पर यात्री बेहाल: धर्मसिंहवा रोडवेज सेवा का सच।।

  1. बस्ती मंडल,

वृहस्पतिवार 22 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।

संतकबीरनगर।। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की कार्यप्रणाली पर इन दिनों बड़े सवालिया निशान लग रहे हैं। सरकारी फाइलों में तो धर्मसिंहवा की सड़कों पर रोडवेज बसें ‘सरपट’ दौड़ रही हैं, लेकिन हकीकत यह है कि स्थानीय ग्रामीण आज भी एक अदद बस की राह ताक रहे हैं। यह विडंबना ही है कि जिस सेवा का लाभ जनता को मिलना चाहिए, वह केवल विभागीय रिपोर्टों में सिमट कर रह गई है।

👉फाइलों का ‘झूठ’ और जनता का ‘दर्द’

हाल ही में सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (बस्ती) को लिखे गए पत्र के जवाब में दावा किया गया कि संतकबीरनगर से सिद्धार्थनगर जाने वाली बसें बस्ती होते हुए धर्मसिंहवा मार्ग पर संचालित हैं। लेकिन यह दावा उस समय खोखला साबित हो गया, जब धर्मसिंहवा के नाम पर आवंटित बस को बांसी क्षेत्र में देखा गया। सवाल यह उठता है कि अगर बस का रूट धर्मसिंहवा है, तो वह दूसरे रास्तों पर क्या कर रही है?

“क्या परिवहन विभाग के अधिकारी एसी कमरों में बैठकर काल्पनिक रूट चार्ट तैयार कर रहे हैं? कागजों पर दौड़ती बसें ग्रामीणों की यात्रा सुगम नहीं बना सकतीं।”

👉निजी वाहनों की ‘लूट’ का शिकार ग्रामीण

रोडवेज सेवा की अनुपस्थिति ने निजी वाहन चालकों को मनमानी का खुला लाइसेंस दे दिया है। धर्मसिंहवा और आसपास के ग्रामीणों को मजबूरी में डग्गामार वाहनों और निजी बसों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहाँ उनसे मनमाना किराया वसूला जाता है। शासन की ‘सुलभ परिवहन’ योजना यहाँ के ग्रामीणों के लिए केवल एक सपना बनकर रह गई है।

👉प्रशासन से सीधे सवाल:

गुमराह कौन कर रहा है? जब बसें धरातल पर नहीं हैं, तो किस आधार पर संचालन की रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है?

निगरानी का अभाव: क्या बसों के जीपीएस (GPS) और रूट लोकेशन की जांच करने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं है?

आर्थिक शोषण की जिम्मेदारी किसकी? डग्गामार वाहनों द्वारा ग्रामीणों से की जा रही अवैध वसूली का जिम्मेदार किसे माना जाए?

👉जांच और कार्रवाई की दरकार

स्थानीय ग्रामीणों ने अब इस ‘कागजी खेल’ के खिलाफ आवाज बुलंद की है। मांग की जा रही है कि उच्चाधिकारी स्वयं मौके पर आकर रूट का भौतिक सत्यापन करें। जनता को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क पर चलती हुई रोडवेज बस चाहिए। यदि जल्द ही नियमित संचालन शुरू नहीं हुआ, तो यह आक्रोश बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।

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